भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में इस जनता कर्फ़्यू का एलान किया। 29 मिनट के संबोधन में उन्होंने कहा कि देश को आने वाले समय की चुनौती से जूझने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने इस चुनौती से लड़ने के तौर पर पहला क़दम जो उठाया है वह है जनता कर्फ्यू। मोदी ने एलान किया कि, एक साथ पूरे देश में 22 मार्च रविवार को सुबह सात बजे से रात 9 बजे तक कर्फ़्यू लगाया जाएगा। बताया जा रहा है कि इस कर्फ्यू के ज़रिए मोदी सरकार कोरोना से लड़ने की अपनी क्षमता का आकलन और लोगों को एक दूसरे से अलग करने की स्थिति का सामना करने की तैयारी करना चाहती है। भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि कोरोना वायरस के कारण पैदा हुई चुनौती कोई आम चुनौती नहीं है। उन्होंने भारत के लोगों से अपील की है कि वे समाज से अलग रहने का अभ्यास करें। मोदी ने कहा, "परीक्षा की घड़ियां आती हैं लेकिन हमें अनुशासन बनाए रखना है ताकि वायरस के फैलाव को रोक सकें।"
वहीं भारत में अब तक 200 से अधिक लोग कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं जबकि इस वायरस के कारण 4 लोगों की मृत्यु की पुष्टि भी हो चुकी है। फिलहाल माना जा रहा है कि भारत में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण लोगों के मन में आशंकाएं तेज़ हो रही हैं। मोदी ने कहा कि अनिवार्य सेवाओं के लिए काम करने वाले लोगों के अलावा बाक़ी सब को कई सप्ताह तक घर में रहना होगा। उन्होंने इसके लिए कोई समय सीमा नहीं बताई। भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा, "अगर आप सोचते हैं कि आप पर असर या संक्रमण नहीं होगा तो आप ग़लत हैं, आप अपने परिवार और समुदाय को ख़तरे में डाल रहे हैं इसलिए मैं हर नागरिक से अनुरोध करता हूं कि वे अगले कुछ हफ्तों तक घर में रहे।" मोदी ने कहा कि भारत को मौतों के "विस्फोट" से ख़ुद को बचाना होगा जैसा कि दूसरे देशों में देखा गया है।
भारतयी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र को दिए गए भाषण और उनके द्वारा जनता कर्फ़्यू का किए गए एलान के बाद, न केवल भारत में बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई जानकारों ने कहा है कि मोदी का यह निर्णय कुछ हद तक सही हो सकता है लेकिन उसके लिए उन्हें अधिक समय तक कर्फ़्यू लगाना होगा और साथ ही साथ लोगों को वह तमाम सुविधाएं उपलब्ध करानी होगी जो एक इंसान को जीवित रहने के लिए ज़रूरी है। जानकारों का कहना है कि मोदी पहले देश की जनता को कोरोना से लड़ने के लिए जो चीज़े आवश्यक हैं और जो अन्य देश की सरकारें अपने देश के नागरिकों को उपलब्ध करा भी रही हैं उसे आम जनता तक पहुंचवाएं और उसके बाद कर्फ़्यू जैसे हालात बनाएं। इस सयम भारत में मास्क, ग्लव्स और सेनिटाइज़र की भारी कमी देखने को मिल रही है। वहीं दूसरी ओर खाद्य पदार्थों की क़ीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसे हालात में अगर भारत में कई दिनों तक कर्फ़्यू लग गया तो जितनी मौतें इस घातक कोरोना वायरस से नहीं होंगी उससे कहीं अधिक मृत्यु भूख और प्यास से हो जाएगी। वहीं सोशल मीडिया पर भी मोदी के जनता कर्फ़्यू का जहां कुछ लोग स्वागत कर रहे हैं वहीं इसका विरोध करने वालों की संख्या भी कम नहीं है। लोगों का कहना है कि मोदी जब से भारत के प्रधानमंत्री बने हैं उन्होंने जुमलों के अलावा देश की जनता को कुछ नहीं दिया है ऐसे लोगों का कहना है “मोदी जी जुमलों से कब तक चलेगा काम।”